अनजाना था रस्ता, अपना बन गया
बेगाना सा हर रिश्ता, अपना बन गया
अनजाना था रस्ता, अपना बन गया
बेगाना सा हर रिश्ता, अपना बन गया
वक्त के पास, हैं यहां सारे ज़बाब
सवालों को रक्खो, थाम के ज़रा
वक्त बदलेगा ज़रूर, वक्त आने पर
हक़ीक़त कैसे अपना, सपना बन गया
अनजाना था रस्ता, अपना बन गया
बेगाना सा हर रिश्ता, अपना बन गया
ख्वाबों सी दुनियां, मुझको भी अज़ीज़
बेगाना कुछ नहीं, सब अपना लगता है
कोई दायरे नहीं, अपनाने के इधर
अपनापन जब जता, सब अपना बन गया
अनजाना था रस्ता, अपना बन गया
बेगाना सा हर रिश्ता, अपना बन गया
अनजाना था रस्ता, अपना बन गया
बेगाना सा हर रिश्ता, अपना बन गया
अनजाना, बेगाना, अपना, बन गया!