दिल की ख़ामोशियों से, मिला, कभी कुछ नहीं
बात जब ना कह सके, सोचने, का भी क्या फ़ायदा
दिल की ख़ामोशियों से, मिला, कभी कुछ नहीं
दिल मचलता रहा, आरज़ू, दिल ही दिल में लिए
ऐसी मासूमियत में, जलते रहने, का क्या क़ायदा
दिल की ख़ामोशियों से, मिला, कभी कुछ नहीं
वक़्त हर वक़्त लेता ही रहता, यहाँ करवटें
ख़ुद ही ख़ुद कर लिया, ऐसा क्या वायदा
दिल की ख़ामोशियों से, मिला, कभी कुछ नहीं
यूं तो होता है अनजान, हर कोई ही यहाँ
जान कर अनजान, रहने का, क्या फ़ायदा
दिल की ख़ामोशियों से, मिला, कभी कुछ नहीं
दिल की ख़ामोशियों से, मिला, कभी कुछ नहीं
बात जब ना कह सके, सोचने, का भी क्या फ़ायदा
दिल की ख़ामोशियों से, मिला, कभी कुछ नहीं