कैसे धीर धरू मनवा, मन में पीर बड़ी है
ओ प्रियतम प्यारे तुम बिन, जियरा फांस गड़ी है।
ये दो नैना तरस रहे, कब से मिलन आस में
पागल रह रह बरस रहे, तेरे विरह त्रास में।
ज्यों चकवा चकवी तड़पें, बिना एक दूजे के
ज्यूँ चाँद चांदनी अधुरे, बिना एक दूजे के ।
मैं भी तड़पत हूँ रसिया, अँखिया खूब लड़ी है
ओ प्रियतम प्यारे तुम बिन, जियरा फांस गड़ी है।
अब आ शीघ्र मिलो सजना, तुम और न देर करो
जाने न कौन घडी आय, प्रलय अब अँधेर हरो।
पता नहीं फिर अब तुमसे, कब मिलना नसीब हो
इंतजार युग युग तक हो, और मौत करीब हो।
तकती राह प्रेयसी यह, प्रिय अब जान अड़ी है
ओ प्रियतम प्यारे तुम बिन, जियरा फांस गड़ी है।
किस तरह रिझाऊँ रसिया, तुझको मैं ना जानूँ
किस तरह बुलाऊँ छलिया, तुझको मैं ना जानूँ।
अगर मेरी लेखनी में, मीरा से गीत नहीं
कदापि यह नही अर्थ की, मुझे तुमसे प्रीत नहीं।
इंदु नयन कह रहे पिया, आ असुवन की झड़ी है
ओ प्रियतम प्यारे तुम बिन, जियरा फांस गड़ी है।