खुद को खो दिया तुझे पाने की राह में,
कुछ देखा नहीं तेरे दीदार की चाह में,
तू है, यहीं है, वरना दिल बेताब न होता,
ये सांसे है ये आहे है सब तेरी पनाह में।
मेरी हर नज़्म तुमसे हर शायरी मेरी तुमसे है,
मेरी हर सुबह तुमसे हर शाम मेरी तुमसे है,
में अधुरा रह गया हु आ पुरा कर मुझे,
ये ज़िन्दग़ी की शाम अब पूरी तुमसे है।
मेरी हर आदतों का आगाज़ तुमसे है,
मेरी हर शुरुआत का अंजाम तुमसे है,
मेरी हर महफ़िल शुरू होती तुमसे है,
और खत्म हर जाम तुमसे है।