[Verse 1 - संघर्ष और बचपन का बोझ]
वो बोझ था जो बचपन में ही कंधों पे आ गया,
प्यार नहीं, बस ज़िद थी परिवार की, जिसने धकेला दूर।
हर दिन काम, हर रात पढ़ाई, उस प्रेशर की थी गूँज,
चुप रहा मैं, दिखाया न हार, बस जीता रहा ये सुर।
कॉलेज का गेट देखा, पर बचपन ग़ायब, वो पल जीया नहीं,
ज़िंदगी चलती रही, सिखाती रही कि कोई सहारा नहीं।
दोस्त नहीं, बस सब मतलब के थे, प्यार फ़रेबी निकला,
बिना बताए गया, खाली हाथ दुनिया में निकला।
[Pre-Chorus - रोशनी और उम्मीद]
फिर एक दिन, अँधेरे में जब सब खो चुका था मैं,
तुम रोशनी बन कर आई थी, मेरे लिए आशा लाई थी।
वो ही वक़्त था जब दिल ने, पहली बार हँसना सीखा,
क्यूँ क़दर देर से हुई, ये राज़ आज तक मैंने न पूछा।
[Chorus - सफ़र की दास्तान]
ये सफ़र मेरी कहानी, हर लम्हा ज़ुबानी है,
हर चोट, हर ग़लती, अब मेरी ही निशानी है।
हाँ, देर से समझा, पर अब ये दिल ने मान लिया है,
तुम्हारी यादों से ही मैंने जीना सीख लिया है।
क्यूँ ये कसमें निभाता रहा, अब ये सवाल बाक़ी है।
[Verse 2 - माफ़ी और अलगाव का सच]
हाँ, ग़लती थी मेरी, मैंने बताया नहीं क्यूँ दूर जाने को बोला था,
वो मजबूरी थी, पर मैंने तीन साल किया कोशिश, एक मौक़ा मिले बस।
तुमने न दिया मौक़ा, न ही वक़्त, बस रखा मुझे दूर,
झूठ बोलके कि तू आगे बढ़ गई हो, पर जानता हूँ मैं।
तुम्हारी हँसी में वो सच्चाई नहीं, जो कभी मेरी थी,
अब हम इतने आगे बढ़ गए हैं, कि पीछे भी नहीं जा सकते।
पुराने ज़ख्मों को फिर से कुरेदना, अब आसान नहीं है,
तुम्हारी ख़ामोशी अब मेरी ज़िंदगी की आख़िरी रीत बन गई है।
[Bridge - स्वीकार और अंतिम इच्छा]
पुरानी किताब का, बंद पन्ना हो तुम, आँख भर आती है,
ये फ़ासले अब एक सज़ा हैं, जो दिल रोज़ दोहराता है।
लेकिन शायद कभी हम मिलें, तो पुरानी बातें निकलें,
और उन्हीं बातों को सोच के, हम फिर से मुस्कुरा दें।
बस एक आख़िरी मुलाक़ात, जहाँ न हो कोई शिकायत, न कोई तकरार।
[Outro]
अब ये दिल कहीं नहीं जाएगा, वहीं खड़ा है,
जहाँ तुमने छोड़ा था... पर अब जीना सीख लिया है।
ये सफ़र अधूरा नहीं, अब ये ही मेरा सच है।