[Verse 1]
रात घनी है, शहर सो गया है,
पर यह दिल अभी तक जागा हुआ है।
मैं तो रुक गया था उस मोड़ पर ही,
जहाँ तुमने कहा था, "अलविदा है।"
वही आवाज़ अभी तक कानों में है,
जैसे हर पल नया एक सिलसिला है।
[Pre-Chorus]
क्या तुम भी कभी मुड़ कर देखती हो,
वो बीते हुए रस्ते, वो बीती हुई शाम?
[Chorus]
क्यों यह यादें जाती नहीं,
हर एक ग़लती सताती रही?
मैं वही खड़ा हूँ, जहाँ तुम थी आख़िरी,
क्यों यह कसमें निभाता रहा?
क्या यह प्यार सिर्फ़ मेरा ही था?
[Verse 2]
हमने कितने ही सपने सजाए थे,
तुमने हँस कर कितने वादे निभाए थे।
अब सब ख़ाली है, सिर्फ़ मीठा दर्द है,
जैसे गीली मिट्टी से घर बनाए थे।
मैं बस एक किताब का खुला पन्ना,
तुम तो अपनी कहानी बदल चुकी हो।
[Outro]
क्या हमारी कहानी वही थी, या बस मेरा गुमान था?
बस एक बार कह दो... क्या हम कभी मिलेंगे?