

Prompt / Lyrics
प्रज्वलित स्वर्ण प्रभा के दीप दूर कर तिमिर सघन
दीप वर्तिका ज्योत कर हर्षित प्रफुल्लित तन मन
अपरिमित प्रकाश जलधि फैला रही सौरभ विपुल
लिए नवल प्रभा नवल उमंग दीप माला अतुल
हृदयंगम तमसो मा ज्योतिर्गमय
ओ प्रभु कर दे हृदय आलोकमय
घृतवती ये दीपशिखा, वेद-वाणी का है स्वर,
ऋषि-प्रेरणा जलती इसमें, ज्यूँ भानु उदय प्रखर
दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म
जग का तम हरने को, जाग्रत हुआ यह ब्रह्म भ्रम
दीप अवलि का हर्ष अंतस विलय
ओ प्रभु कर दे हृदय आलोकमय
लक्ष्मी वसति न हेम में, बसे निर्मल अंतःकरण
जहाँ प्रेम दीप जलता, वहीं उतरते हैं चरण
श्रीं हृदये च लक्ष्म्याः, भक्तिभाव से शोभित तन
जय जय लक्ष्मी मैया मंगल दीप जले हर क्षण
कर मात लक्ष्मी चित्त शांत सदय
ओ प्रभु कर दे हृदय आलोकमय
जला कर दीप मनोमय, करुणा का ले संदेश,
द्वेष, मोह, अज्ञान जला माँ प्रेम ज्योति निवेश
भव सर्वे भवन्तु सुखिनः… सर्वे सन्तु निरामया
प्राणियों में भरो विष्णु प्रिया करुणा भक्ति दया
निकेत आत्मा मेरी विमल अभय
ओ प्रभु कर दे हृदय आलोकमयTags
pure indian classical style
4:00
No
10/19/2025