तेरे बिना ये साँसें अधूरी हैं,
तेरे बिना ये रातें जुदा-सी होती हैं।
खिड़की के पार जो चाँद ढलता है,
उसमें भी तेरा परछाई सा दिखता है।
हर मोड़ पर तेरा नाम मिलता है,
हर हवाओं में तेरी बातें गूंजती हैं।
मैं चलता हूँ पर परछाईं का पीछा करता नहीं,
क्योंकि परछाईं में अब तेरा अक्स नहीं।
तेरी मुस्कान जो कभी दिल में रौशनी थी,
अब यादों की मिट्टी में दबी हुई ख़ुशबू है।
कभी तेरी बातों से जो दिल मेरा हँसता था,
आज वही बातें आँसुओं से भीगी हुई हैं।
(किसी दिन) मैंने सोचा था कि वक्त सब ठीक कर देगा,
पर वक्त ने बस नाम बदल दिया — तेरे बिना का।
कहानी अधूरी है पर मैं उसे हर दिन पढ़ता हूँ,
क्योंकि तेरे जाने के बाद भी तुम मेरी ज़बान पर हो।
कभी रात में तेरा हाथ याद आता है,
कभी सुबह तेरी आवाज़ आकाश में बजती है।
मैं पूछता हूँ हवा से — क्या तूने उसे भी देखा?
हवा हँसती है, कहती है — उसने भी तुझे महसूस किया।
तू जहाँ भी है, खुश रहना मेरी दुआ है,
तेरे बिना मेरा घर बस नाम का घर है।
धड़कनें अभी भी तेरा ही पता पकड़ती हैं,
तेरे बिना ये साँसें अधूरी हैं — यही सच्चाई है।
कभी अगर तुम लौट आओ — तो मैं वहीँ रहूँगा,
नहीं लौटोगी तो यादें ही मेरी सहारा रहेंगी।
तेरे बिना ये साँसें अधूरी हैं, पर ये साँसें जिंदा हैं,
तेरी याद की खुशबू से ही तो ये ज़िन्दगी महकती है।