बारिश की महक और तेरी याद साथ आई,
मिट्टी में तेरा नाम लिख कर हवाएँ रो दीं।
छत से टप-टप गिरती बूंदें कहती रहीं,
“कभी तो लौट आओ, दिल की खिड़की खुली पड़ी है।”
ऊपर से बादल भी कुछ कह रहे थे — “वो खुश है यहाँ,”
पर मेरे अंदर के मौसम का कोई हिसाब नहीं था।
तेरी छूटी हुई चाय की प्याली जस की तस रखी है,
उसमें अभी भी तेरी गर्माहट का असर है।
रास्ते अब भी वहीँ से गुजरते हैं जहाँ तुम चली गयीं,
फिर भी किसी ने तेरे कदमों की आह गुलाबों पर नहीं पड़ी।
मैं वही गीत गाता हूँ — तुम्हारे बिना जीना सिख गया,
पर आँखें पूछती हैं — क्या तू भी कहीं मेरे बारे में सोचती है?
तुम्हारे भेजे संदेशों की रोशनी फ़ोन पर बची है,
पर उसकी हर लाइन अब दिल के किसी कोने में दबी है।
बारिश की हर बूंद तेरी हँसी की प्रतिध्वनि बनकर आती है,
और मैं हर बूंद में तुम्हें ढूँढता रह जाता हूँ।
बारिश थम जाये या ना थमे — यादें बरसती रहेंगी,
तेरी खुशबू मेरी हवाओं में हमेशा बसी रहेगी।
बारिश की महक, तेरी याद — ये सफर खत्म नहीं होगा,
जितनी दूर तुम जा सकोगी, उतनी पास मेरी यादें रहेंगी।