हम जो कभी थे, वो पल अब कहानी बन गए,
हम जो हँसे थे, वो गीत तेरे मेरे नाम बन गए।
घडी की टिक-टिक में तेरी हँसी छुपी थी,
और मेरी बेपरवाही में तेरा प्यार दबा रहा।
कितनी बार मैंने सोचा — कल सब ठीक होगा,
पर कल ने फिर कल को जन्म दिया और तुम चली गयी।
सफे पर तुम्हारे नाम की लिखावट अभी भी है,
कभी मिटती नहीं, बस धुंधली होकर गाढ़ी होती जाती है।
हम जो कभी थे, उन्हीं राहों पर मैं चलता हूँ,
हर पेड़ से पूछता हूँ — क्या तुमने उसे देखा?
पत्तों की सरसराहट भी अब तेरे कदमों जैसी लगती है,
हवाओं की चाल भी तेरी आवाज़ गुनगुनाती है।
तुम्हारी तस्वीर मेरी जेब में नहीं, पर दिमाग़ में घिरती है,
तुम्हारी आदतों की खुशबू कपड़ों पर नहीं, पर साँसों में बसी है।
हम जो कभी थे — एक कविता थी, एक अँधेरी रोशनी,
आज वही रोशनी स्मृति बनकर रातों में चमकती है।
कभी सोचता हूँ — मुझे क्या चाहिए था?
तुम्हारी एक मुस्कान या तुम्हारे साथ की ज़रूरत?
जवाब मुश्किल है, फिर भी मैं मानता हूँ —
में तुम्हारे बिना किसी रंग का नहीं हूँ।
हम जो कभी थे, उसे अब कोई छू न पाए,
पर मैं दिन भर उसी का नाम ले कर गुज़र जाऊँगा।
तुम जहाँ भी हो — खुश रहना मेरी दुआ है,
हम जो कभी थे — वो यादें मेरी ज़िन्दगी की किताब हैं।