[Intro]
कभी सोचा नहीं था कि ये अंत होगा,
कि हम एक-दूसरे के लिए बस एक 'कहानी' बन जाएंगे।
तुम तो अपनी कहानी लिख रहे हो अब,
पर मेरी कलम वहीं रुक गई है।
[Verse 1]
रात के दो बजे हैं और हाथ में फोन है,
तेरा नंबर डायल करूँ, पर तू अब कौन है?
अजनबी सा लगता है अब तेरा वो नाम,
जिसके लिए कभी कुर्बान थी मेरी हर शाम।
कॉफी का वो कप अब ठंडा ही रहता है,
ये कमरा तेरी यादों में चुपचाप बहता है।
[Pre-Chorus]
सब कहते हैं कि तुम बदल गए हो,
पर सच तो ये है कि तुम संभल गए हो।
सिर्फ़ मैं ही हूँ जो आज भी बिखरा हुआ है,
तेरी यादों के घेरे में उतरा हुआ है।
[Chorus]
कितनी आसानी से तुमने ये कह दिया,
कि "जो था वो बस एक इत्तेफ़ाक था।"
मेरे लिए तो वो पूरी कायनात थी,
तुम्हारे लिए शायद बस एक रात थी।
अब इन बेनाम फासलों का मैं क्या करूँ?
जी तो रहा हूँ, पर हर पल मैं क्यों मरूँ?
तू हकीकत है या बस मेरा कोई वहम है,
तेरा दूर जाना, मुझपे खुदा का रहम है या सितम है?
[Verse 2]
वो जो तुमने मेरे कंधे पर सिर रख के सपने देखे थे,
क्या वो सपने अब तुम किसी और की आँखों में सजाते हो?
मेरी पसंद का वो गाना, जो तुम्हें रटा हुआ था,
क्या अब वो गाना तुम दूसरों को सुनाते हो?
दर्द ये नहीं कि तुम चले गए,
दर्द ये है कि तुम मुझे मुझमें ही मार गए।
[Bridge]
मैं ढूँढता हूँ खुद को तेरी उन पुरानी तस्वीरों में,
शायद मिल जाऊँ कहीं उन हाथों की लकीरों में।
पर अब वहाँ सिर्फ़ खालीपन मिलता है,
जैसे पतझड़ में कोई सूखा पत्ता गिरता है।
तुमने तो नए रिश्ते बुन लिए होंगे,
मेरे हिस्से के आंसू तो मैंने ही चुन लिए होंगे।
[Chorus]
कितनी आसानी से तुमने ये कह दिया,
कि "जो था वो बस एक इत्तेफ़ाक था।"
मेरे लिए तो वो पूरी कायनात थी,
तुम्हारे लिए शायद बस एक रात थी।
[Outro]
अब कोई शिकायत नहीं है तुमसे,
बस एक टीस बाकी है इस दिल में।
जाओ, आबाद रहो अपनी नई दुनिया में,
मैं यहाँ तुम्हारी यादों के साथ ही खुश हूँ।
अलविदा... फिर कभी नहीं।