चुरा लाई हूं, सपने अपार
अपने सपने, कितने हज़ार
हम देखेंगे, तुम भी देखना
पंख ले जायेंगे, बादल के पार
मेरा सपना, सभी का है
मेरा अपना, हर कोई है
तुम भी, वो भी, सारा ही जग है
सब तरफ़ अपना, है परिवार
चुरा लाई हूं, सपने अपार
अपने सपने, कितने हज़ार
आँख भर आयी, कभी तो क्या
दिल की बातें हैं, मन का है क्या
वक़्त बदलेगा, सब सुन लो ज़रा
क़िस्मतें बनती, हैं ख़ुदबख़ुद चार
चुरा लाई हूं, सपने अपार
अपने सपने, कितने हज़ार
कोई नग़मा, कोई हो गीत
सारे ही तो हैं, मेरे मनमीत
हर तरफ़ बिखरी, देखो तो प्रीत
नये हैं रस्ते, नयी रीत संसार
चुरा लाई हूं, सपने अपार
अपने सपने, कितने हज़ार
चुरा लाई हूं, सपने अपार
अपने सपने, कितने हज़ार
हम देखेंगे, तुम भी देखना
पंख ले जायेंगे, बादल के पार