क्या यही इश्क़ था — जो हमें जला गया, या यह एक ख्वाब था?
क्या तेरी मुस्कान किसी और खुशी की ओर झुकती थी?
मेरे सवालों की भीड़ में जवाब कहीं खो गया,
और मैं अकेले ही अपने ही सवालों को सहलाता रहता हूँ।
तुम्हारे जाने पर मैंने अपने आप को जो खोजा,
वही सच्चाई थी — मैं अधूरा था, तुम अधूरी नहीं थीं।
हम दोनों में एक साथियाँ थी, पर नज़रें अलग थीं,
और वही नजरें हमारे रास्ते अलग कर गयीं।
अब जब शाम ढले, तो मैं अपने आप से पूछता हूँ —
क्या मैं बदल जाऊँ या बस तुम्हें भूल जाऊँ?
उत्तर में बस चुप्पी मिलती है — मीठी और खट्टी,
और मैं जान गया — कुछ चीजें वक्त ही समझा सकता है।
क्या यही इश्क़ था — या सिर्फ़ एक मुस्कुराहट?
मैं प्रश्नों में जीता हूँ, पर तुम्हें दिल से चाहूँगा हमेशा।
क्योंकि प्यार कोई सवाल नहीं, यह एक एहसास है,
और मैं तुमको उस एहसास की वजह से कभी भूला नहीं पाऊँगा।