तेरे बिना... मैं अधूरा सा हूँ,
जैसे साज़ हो... पर सुर न हो।
तू जो मिले...
तो लगे मुझको...
जैसे रूह को अब... गुरुर हो।
हर शाम... तेरा नाम लेकर...
मैं तन्हा... हवाओं से बात करूँ।
तू पास नहीं... फिर भी हर पल...
तेरी ही तो... यादें साथ करूँ।
तेरी हँसी... की वो खनक...
अब भी दिल में... गूंजती है।
तेरे बिना... ये ज़िंदगी...
सिर्फ साँसों सी... लगती है।
तेरा साथ... ही तो था वो जादू...
जिससे हर ग़म... मिट जाता था।
अब हर लम्हा... बस तेरी याद में...
धीरे-धीरे... कट जाता है...
तेरे बिना... जो अधूरा हूँ...
शायद फिर... पूरा हो जाऊँ...
अगर कभी... लौट आए तू...
मैं फिर से... जीना सीख जाऊँ।