ये ज़िन्दगी रहे हरदम तेरी पनाहों में
मौत भी आये तो आ जाये तेरी बाँहों में
कभी अश्क़ों से जो लबरेज रहा करती थीं
अब फ़क़त प्यार बरसता है इन निगाहों में
ये क्या हुआ है कि जीने की ललक जाग उठी
ये कौन मिल गया मुझको उदास राहों में
उनका दिल, उनकी नज़र, और नज़ारा उनका
कुछ नए ख्वाब से पलते हैं इन निगाहों में
वो तबस्सुम से खिले रहते हैं लब पर मेरे
वो बसे हैं मेरी पलकों की नर्म छाओं में
यूँ न मिल पाएं तो सपनो में बुला लूँ उनको
मैंने पलकें ही बिछा दी हैं ख्वाब गाहों में
मेरी रातों में बिखर जाती है उनकी खुशबू
नूर उनका ही बिखरता है सब दिशाओं में
वो जहाँ भी रहें सुख से रहें, सलामत हों
बस यही मांगती रहती हूँ मैं दुआओं में