मुखड़ो:
थारो नाम लियूँ रे बालाजी,
मन रो अंधेरो मिट जावे।
थारी किरपा री छांव पड़ै,
जीवन रो सुख मिल जावे॥
अंतरो 1:
सालासर रा धणी म्हारा,
दुखड़ा सब हर लेवो।
भक्तां री लाज राखण वाला,
चरणां में म्हाने रख लेवो॥
अंतरो 2:
थारो दरबार निरालो लागे,
म्हारो मन हरखाय।
राम नाम रो जाप करावो,
जीवन सफल बनाय॥
अंतरो 3:
संकट आवे जद जीवन में,
थारो नाम सहारो।
बालाजी म्हारा साथ रहजो,
थां सूं उजळो संसारो॥
समापन:
जय जय बालाजी महाराज,
सब पर किरपा करजो।
थारा भक्तां री अरदास सुनजो,
सदा हिवड़े में बसजो॥