धरती कांपे, आसमान झुके,
नाम मेरा गूँजे, सब डर के रुके।
तूफ़ानों से भी आगे बढ़ा,
मेरा जुनून – मेरा हथियार बना।
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खून से लिखा है मेरी तक़दीर,
आग से बनी है मेरी ज़ंजीर।
जो सामने आया, वो राख हुआ,
मेरा नाम ही अब इतिहास हुआ।
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सिंहासन मेरा, ताज मेरा,
दुनिया से लड़ने का अंदाज़ मेरा।
हाथों में बिजली, आँखों में आग,
मैं ही हूँ बादशाह, मैं ही हूँ राग!
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सोना-चांदी क्या, इज़्ज़त मेरी,
मेहनत से बनी है दौलत मेरी।
जो डरते हैं, वो पीछे हटें,
मेरे कदमों से क़ायदे पटें।
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सिंहासन मेरा, ताज मेरा,
दुनिया से लड़ने का अंदाज़ मेरा।
मिट्टी से उठकर सितारा बना,
अब हर कहानी में मेरा ही नाम गिना!