सोचो कल की बातें
नहीं है बात पुरानी
बीआरपी श्रमवीरों ने
रची थी न ई कहानी।।
बीआरपी सेनानी, हैं हम सेनानी ।।
कोई यू पी से आया था,
कोई पंजाबी, ।
कोई आया महाराष्ट्र से
कोई राजस्थानी, ।।
कोई तेलंगाना कोई केरल वासी।
कोई बिहारी बंगला या फिर उत्कलवासी, ।।
बी आर पी हम जो मिले थे,
लिख दी न ई कहानी।।
बीआरपी सेनानी, हां हम सेनानी ।
सब की मेहनत से , फौलादी ईंट बनाया
धीरे धीरे जग में अपना नाम बनाये।
कभी फाग कभी कुचिपुड़ी, कभी भंगड़ा पाये।
मिल जुल कर के सारे ही त्योहार मनाये
श्रमवीरों की यह बातें ,
नहीं होगी कभी पुरानी, ।
बीआरपी सेनानी, हां है सेनानी