बरसाने की गलियों में, राधा ने पिया पुकारा,
मुरली वाले मोहन ने, मन का द्वार उघारा।
प्रेम की बंसी बजती रही, दिल की धुन में खोया,
श्याम सलोना मन भावन, राधा संग संजोया।
(कोरस)
राधे कृष्णा, राधे कृष्णा, प्रेम का सागर तू,
तेरे नाम की माला जपूँ, हर साँस में तू ही तू।
राधे कृष्णा, राधे कृष्णा, प्रेम की है ये गाथा,
जग सारा बोले राधे राधे, कृष्णा बंसी वाला।
(अंतरा 2)
गोपी मन में उमंगें, जब श्याम रूप निहारे,
चाँद भी शरमाए, जब राधा संग वो विचारे।
रास रचाया वृंदावन में, प्रेम का रंग लगाया,
राधे के नैनों में मोहन, जैसे सागर में छाया।
(कोरस दोहराव)
राधे कृष्णा, राधे कृष्णा, प्रेम का सागर तू,
तेरे नाम की माला जपूँ, हर साँस में तू ही तू।
राधे कृष्णा, राधे कृष्णा, प्रेम की है ये गाथा,
जग सारा बोले राधे राधे, कृष्णा बंसी वाला।