सा रे ग म
श्याम मुरारी
वृंदावन के प्राण प्यारे
गोविंद गोकुल वाले
बंसी की मधुर तान में, मन के भाव बहें
श्याम के चरणों में झुके, जो भी द्वार गहें
पीताम्बर में शोभित छवि, करुणा की ये खान
हर युग में जो साथ चले, वही है श्री भगवान
गोकुल की गली, माखन की थाली
कन्हैया की चाल, जैसे चांद की लाली
यशोदा की डाँट भी जैसे वरदान
बाल गोपाल की लीला – beyond your plan
माखन चुराया, राधा को चिढ़ाया
पग धरती पर रख, स्वर्ग को बुलाया
नंद के आँगन में हँसी जो बसी
वही हँसी अब तक ब्रज में हंसी
रणभूमि जले, पर कृष्ण खड़ा
धर्म की डोर उसी ने पकड़ा
कर्म कर, बोले वो गीता में
अर्जुन बना वीर उसी की प्रीता में
रथ का सारथी, बना स्वयं ज्ञानी
हर शब्द में उसके बसी वेदों की वाणी
शंख बजाया, रण में समाया
विनाश में भी ज्ञान जगाया
विराट वो रूप, ब्रह्मांड की चाल
सूरज चाँद सब उसकी डाल
जो समय से आगे, पर प्रेम से भारी
वो श्याम, वो योगी, वो लीला की सवारी
धीर धाना, ताना ना
गोविंद राधा का है साजना
Bringing love in every verse
Krishna’s vibe – the universe