गीत : “जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया” की तर्ज़ पर
भगवान् बुद्ध वंदना गीत
जहाँ ज्ञान-दीपक जलते थे,
वो भारत देश हमारा।
जहाँ बुद्ध ने प्रेम सिखाया,
वो पावन देश हमारा॥
मुखड़ा :
बुद्धं शरणं गच्छामि,
धम्मं शरणं गच्छामि।
करुणा और सत्य का संदेश,
जग को देने वाले बुद्ध महान॥
कपिलवस्तु में जन्म लिया था,
सिद्धार्थ नाम सुहाना।
राजमहल के सुख छोड़कर,
ढूँढा जीवन का ठिकाना॥
दुखियों का दुख दूर करें जो,
ऐसे दयावान।
सत्य-अहिंसा का पथ दिखलाएँ,
भगवान बुद्ध महान॥
बोधिवृक्ष के नीचे बैठकर,
ज्ञान का दीप जलाया।
मोह-माया के बंधन तोड़कर,
जीवन का अर्थ बताया॥
लोभ-क्रोध को दूर भगाकर,
भर दें मन में ज्ञान।
शांति और मानवता के दाता,
भगवान बुद्ध महान॥
सारनाथ में धर्मचक्र को,
पहली बार चलाया।
प्रेम, दया और मध्यम मार्ग का,
सुंदर पाठ पढ़ाया॥
जाति-पाति का भेद मिटाकर,
दिया सबको सम्मान।
जन-जन के उद्धारक बनकर,
पूजे जाएँ भगवान॥
आज भी बुद्ध का नाम जगत में,
देता नया विहान।
करुणा, मैत्री और सत्य का,
गूँजे पावन गान॥
अंतरा :
बुद्धं शरणं गच्छामि,
संघं शरणं गच्छामि।
विश्व शांति का अमर प्रतीक,
भगवान बुद्ध महान॥
[Female Vocal]
[Guitar Solo]