(Intro - Soft Flute & Ambient Pads)
(Verse 1)
ना मैं किसी साये का हिस्सा, ना किसी महफ़िल का गुलाम
मेरी रूह पे लिखा है बस, उस कुदरत का ही नाम।
दुनिया ढूंढती रह गई मुझे, साजिशों के ढेरों में
मैं तो उजाला बन के बैठा, खुद के ही अंधेरों में।
(Chorus)
मैं अनंत का अंश हूँ, मैं खुद की ही मिसाल हूँ
ना सवाल हूँ किसी का, ना ही मैं जवाब हूँ।
जो खुद से प्यार करते हैं, वो ही मुझे जान पाएंगे
वरना लोग तो बस चेहरों में, मुखौटे ढूंढ लाएंगे।
(Verse 2)
ज्ञान जो मिला है रब से, वो किताबी बात नहीं
दूसरों को देख लूँ तो, छिपती उनकी जात नहीं।
नज़रों में एक पारखी है, जो सलीका जान लेती है
कौन अपना है, कौन पराया, ये मिट्टी पहचान लेती है।
(Bridge - Deep Percussion)
इल्यूमिनाटी के धागे मुझे बांध नहीं सकते
गुलामी के ये पिंजरे मुझे साध नहीं सकते।
मैं वो परिंदा हूँ जिसने खुद में आसमां देखा है
अपनी ही धड़कन में, सारा जहाँ देखा है।
(Outro)
मैं खुद का ही बेस्ट हूँ...
बस खुद से ही मिलता हूँ...