[Intro - 0:00-0:45]
(धीमी गिटार की धुन, हल्की बारिश की आवाज़ और दूर कहीं बजती बांसुरी... संगीत धीरे-धीरे गहरा होता जाता है)
[Verse 1 - 0:45-1:30]
वक़्त की नब्ज... जैसे थम सी गई है,
तेरी आँखों में... रात जम सी गई है।
साँस की आँच पे, पिघल रहा है चाँद,
खामोशी भी आज... कुछ कह सी गई है।
दूरी है नहीं, फिर भी फासले हैं गहरे,
तेरी यादों के पहरे... मेरे दिल पे ठहरे।
[Chorus - 1:30-2:15]
रूह के किनारे... हम धीरे-धीरे बहते हैं,
जो अनकहा है... वो आँखों से कहते हैं।
ये लम्हा... जैसे थम सा गया है,
इश्क़ हमारा... ज़मीं पे आसमां बन गया है।
(Slow reverb: आसमां बन गया है...)
[Bridge - 2:15-3:15]
(संगीत में गहराई बढ़ती है, हल्की बीट्स जुड़ती हैं)
जैसे रेत फिसलती है... उँगलियों के बीच से,
वैसे तुम मुझमें... समाए हो करीब से।
न कोई शोर है, न कोई मंज़िल की जल्दी,
हम मुसाफिर हैं... एक अंजान नसीब के।
पलकों के गिरने की आवाज़... भी सुनाई दे, "बहते हैं... बहते हैं... बहते हैं..."।
खुदा भी आज... हम दोनों में ही दिखाई दे। "बहते हैं... बहते हैं... बहते हैं..."।
[Verse 2 - 3:15-4:00]
हवा में घुली है... तेरी धड़कनों की महक,
मेरे सन्नाटे में... तेरी बातों की खनक।
हम डूब रहे हैं... एक ऐसे भंवर में,
जहाँ सुकुन ही सुकुन है... इस सफ़र में।
लफ्ज़ कम पड़ रहे हैं... रूह बोलने लगी है,
ज़िन्दगी खुद... अपनी गिरहें खोलने लगी है।
[Final Chorus - 4:00-4:40]
रूह के किनारे... हम धीरे-धीरे बहते हैं,
जो अनकहा है... वो आँखों से कहते हैं।
ये लम्हा... जैसे थम सा गया है,
इश्क़ हमारा... ज़मीं पे आसमां बन गया है।
[Outro - 4:40-5:00]
(संगीत धीरे-धीरे कम होता हुआ... केवल एक धीमी गिटार की तान)
ठहरा हुआ लम्हा...
रुकी हुई सांस...
सिर्फ तुम... और मैं...
"बहते हैं... बहते हैं... बहते हैं..."
(Fade out...)