यहाँ पर भगवान शिव के प्रति भक्ति से भरा एक लंबा भजन दिया गया है:
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जय शिव शंकर, त्रिपुरारी
(कविता शैली में शिव भक्ति गीत)
जय शिव शंकर, त्रिपुरारी,
हर हर महादेव, जय भोले भंडारी!
(1)
कैलाश पर्वत पे धूनी रमाई,
गंगाजल धारा जटा में समाई।
चंद्रमा मुकुट में, सर्प गले डोले,
भस्म से सजी है मृदुल सी भोले।
डमरू बजाते, तांडव दिखाते,
काल भी डर जाए, वो महाकाल कहलाते।
जय शिव शंकर, त्रिपुरारी,
हर हर महादेव, जय भोले भंडारी!
(2)
नंदी के वाहन पे शान से विराजे,
दुष्टों के संहार को त्रिशूल उठाए।
गंगा भी चरणों को धोकर पवित्र,
करती गुणगान, हे शिव अजर-अमर।
आशुतोष दाता, तुम सुख के भाग्य विधाता,
संकट में जो ध्यावे, हर संकट हर लेते।
जय शिव शंकर, त्रिपुरारी,
हर हर महादेव, जय भोले भंडारी!
(3)
रुद्र रूप में प्रलय ले के आते,
पर करुणा में शिव, हर दुख मिटाते।
संसार के पालनहार भी तुम,
विनाश के कारण, आधार भी तुम।
मन से जो पुकारे, सच्चे मन से ध्यावे,
अभयदान देके, शिव हर कष्ट मिटावे।
जय शिव शंकर, त्रिपुरारी,
हर हर महादेव, जय भोले भंडारी!
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