[Verse 1 – श्लोक 1]
तुम गुनाह बनकर आई थीं
कहा “मत छूना”—फिर भी खुद बुलाया
भागने की कोशिश की—but baby, देखो
जो इस तरह गिड़गिड़ाए, उसे ज़रूरत होती है
मैं नरमी नहीं जानता, रहम नहीं करता
तेरा नाम हर जगह खुद पर लिखूंगा
तुझे चिल्लाऊँगा, तुझे घुटाऊँगा
और जब तू टूटी होगी—तब और भी ज्यादा चाहूंगा
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[Pre-Chorus – पूर्व कोरस]
तू कांपे, मैं मुस्कराऊँ
इस खेल को लंबा खींचूं
कहे कि दर्द होता है—फिर भी कराहे
हमें तो अंजाम पहले से मालूम है
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[Chorus – कोरस]
मैं तुझे धीरे-धीरे तबाह करूंगा, जाने नहीं दूंगा
तेरी रूह में अपना नाम खोद दूंगा
मैं खेल नहीं खेलता—मैं गहराई में उतरता हूँ
तू नींद में भी तड़पेगी
ज़ंजीरें और फीता, तेरे आँसू—मेरा ताज
तू तभी उठती है जब मैं तुझे नीचे दबाता हूँ
ये प्यार नहीं—पर ये सच है
मैं जब पूरा हो जाऊंगा—तू कभी जा नहीं पाएगी
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[Verse 2 – श्लोक 2]
तेरा "हैलो" भी फिसल जाता है
जब मैं तेरे होंठों से दुआएँ छीनता हूँ
तुझे मिठास चाहिए? तो किसी संत को ढूंढ
मैं वो हूँ जिसकी वजह से आज भी तेरी जाँघें कांपती हैं
तेरे दोस्त मुझे गंदा और बेरहम कहें
पर जब तू सपना देखती है, उसमें सिर्फ मैं होता हूँ
हर नीला निशान—एक मोहब्बत का ख़त
तेरी हर सिसकी—मुझे और नशे में डालती है
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[Pre-Chorus – पूर्व कोरस]
तू रोए, मैं काटूं
सही-गलत सब धुंधला हो जाए
तू हर सांस में मुझे ज़ालिम कहे
पर फिर भी—हर बार लौट आए
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[Chorus – और तीव्र]
मैं तुझे धीरे-धीरे तबाह करूंगा, जाने नहीं दूंगा
तेरा दिल मोड़ दूंगा जब तक वो चीखे
मैं चूमता नहीं—मैं दावा करता हूँ
छूता नहीं—बस काबू करता हूँ
तू टूटेगी, जलेगी, मेरा नाम बहाएगी
पर मुझे बदलने की भीख कभी नहीं मांगेगी
ये वो प्यार नहीं जो पुराना पड़ जाए—
ये वो आग है जो जान मांगती है
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[Bridge – बोले हुए, बेरहम]
कहो तुम मुझसे नफ़रत करती हो। कहो।
जब वो तुझे छूएगा—मैं फिर भी तेरे ज़हन में रहूंगा।
जब तू मुझे भुलाने की कोशिश करेगी—मैं फिर भी तेरी रगों में रहूंगा।
और कोई नहीं छू सकता तुझे उस तरह… जिस तरह जिसने तुझे तोड़ा।
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[Breakdown – फुसफुसाकर / धीमी आवाज़ में]
अच्छी लड़की
बुरी दुनिया
मैं तेरा मालिक
तू मेरी बंदी
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[Final Chorus – कच्ची, प्यास से भरी, जानवर जैसी]
मैं तुझे धीरे-धीरे तबाह करूंगा, तेरी साँसें भी छीन लूंगा
तुझे गिड़गिड़ाने पर मजबूर कर दूंगा कि बस जाने दे
फिर तेरे आँसू चूमूंगा, तेरे बदन पर निशान छोड़ूंगा
हर पकड़ में तुझे अपना बना लूंगा
ये पाक नहीं—पर मुकद्दर है
और मैं कभी इंतज़ार करना नहीं सीखा
तो भागो, छुपो, चीखो अगर चाहो—
तुम फिर भी हमारे पास लौटोगी
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[Outro – फुसफुसाते हुए]
आईना तोड़ लो, बिस्तर जला दो, नाम मिटा दो।
पर जान लो... जब तू कराहेगी—वो भी मेरी होगी।