काली रातों में जो चमके, वो सितारा मैं,
ख़ौफ़ बन के जो जिए, वो इशारा मैं।
नाम से नहीं, काम से पहचान है,
कह दो दुश्मनों से — अब उनकी शाम है।
(कोरस)
मैं ही हूँ डॉन, हुक्म मेरा कानून,
हर एक चाल मेरी, जैसे हो तूफान का जूनून।
जो मेरे सामने आए, वो टिके कैसे जान,
क्योंकि मैं ही हूँ… मैं ही हूँ डॉन।
(अंतरा 1)
चालें मेरी शतरंज से तेज़ हैं,
हर वार मेरे नाम से खेल है।
साए में भी मेरी कहानी जलती,
मौत भी मुझसे डर के निकलती।
(कोरस)
मैं ही हूँ डॉन, शहर मेरी गली,
जिसपे उठ जाए नजर, उसकी किस्मत भी चली।
मेरे पीछे जो आए, वो खुद बन गए फ़साना,
मैं नाम नहीं, एक ज़िंदा अफसाना।
(ब्रिज)
ना पुलिस, ना सरकार,
मैं खुद हूं अपना दरबार।
नक्शे पे जो खींची है लकीर,
वो मेरी सोच से है भारी तीर।
(आउट्रो)
तो याद रखो ये बात आख़िरी,
डॉन को पकड़ना… नामुमकिन नहीं — पर बहुत मुश्किल है!