(Title: "Kabir Girsa – आवाज़ उठी है")
(Lo-fi हिप-हॉप बीट शुरू होती है)
(Intro - Soft flow)
क्लासरूम से निकला, अब मंचों पे नाम है,
NSUI का शेर, हर जुल्म पे बग़ावत आम है।
(Hook - फास्ट बीट)
कबीर गिरसा — नाम नहीं अलार्म है,
छात्रों की आवाज़, सिस्टम पे वार है।
D.U. की गलियों में नारा यही है,
"जो चुप था कल, आज बोलेगा जी हां!"
(Verse 1)
कंधों पे किताबें, सीने में आग,
वोट नहीं मांगता, वो मांगता है भाग।
हक़ की कहानी, लड़ाई में जूनून,
हर स्टूडेंट बोले — "अब आएगा तूफान जल्द ही जून!"
(Verse 2 - स्लो breakdown)
न भाषण में डर, न नज़रों में झुकाव,
कबीर वो नेता, जो करता है सवाल।
चुनाव नहीं गेम, ये क्रांति का आगाज़,
DUSU की कुर्सी पे अब होगा बदलाव।
(Hook Repeat)
कबीर गिरसा — नाम नहीं अलार्म है,
छात्रों की आवाज़, सिस्टम पे वार है।
D.U. की गलियों में नारा यही है,
"जो चुप था कल, आज बोलेगा जी हां!"
(बीट धीमा होते हुए बंद)