हालाकी .,
आपका मैं शुक्रगुजार हूं !
ये अलग बात हैं ,
मगर एहसान करते करते
इतना
कर न देना साहब !
जिसका शुक्रिया मैं दे न सकून...
सपने दिखाना
कोई बुरी बात तो नही !
जीं मैने देख तो लिया
अब ये न कह देना कही
इसका कर्जा हैं मुझपर....
पीठ पर पहाड लेकर
चल तो रहा हूं फिलहाल
बादल तोड तुफान आगे खडा
करने की जुर्ररत न करना..
अभी फुरसत से सांसे ले पा रहा हूं
सिने पर मेरे मंझिला खडा कर दो
इसकी इजाजत मैं न दु ....
मुझे माफ कर देना जनाब !
सूकून हम चार दिवारो में ही पाते हैं
ये सिशमहाल
आपके खयालो में ही
सजा कर रखा करो
हम मेहमान बन कर आयेंगे
इक दिन अपने
अल्फाझो से दिल के
अंदर तक समा जायेंगे
दिल तो जीत लेंगे आपकी
इसमे कोई शक नहीं
बस हमारी अल्फाझो को
अपने दिल के महल में
सजा कर रखना
कही शिसमहाल में सजा कर रखोगो
शहर में हमारे अल्फाझो के दिवाने रहते हैं
गर वो आकार चुरा ले अगर
तो बस उन्हें चोर न कह देना.
मेरे गैर हाझीरी मे मेरे दिवाने लडके
शहर मे वा वा ही लुटते फिर रहे हैं.
और हमे यहाँ कलेक्टर साहब के
शादी मे कवी संमेलन का न्योता आया हैं..
चेले मेरे गाव मे सरपंच साब की थार मे
गोवा जाकर मेहफिल बना रहे हैं!
और हम !
यहाँ मंत्री जीं के साथ सियारा
मे बेठकर सियाराम से अल्फाझो की शुरुवात
किया तो मेहफिल बन गयी |
मेहफिल से मैने अनुरोध करता हूं मेरी पंक्तीयो में..
" आपके प्यार के वास्ते
मैं सिशमहल छोड दु कुटीया में रेह लू !
हालाकी .,
मेरे अल्फाजो के दिवानो
आपका मैं शुक्रगुजार हूं !
फिर भी एक एहसान
मुझपर कर देना
मगर एहसान करते करते
एहसान न कर देना
जिसका शुक्रिया मैं देना सकून..
अल्फाज.. 📝
D.V.GOPATWAR