ॐ फेण्डेश्वराये नमः फेण्डेश्वराय,
जयति जय-जय फेण्डेश्वराय।
प्रकाश पूंज तू देव अंश का,
है उजियारा नाग वंश का।
हे!!! रुपमति - सोनपाल के जाये,
सुख-समृद्धि देने जग में आये।।१।।
फेण्डेश्वराय – फेण्डेश्वराय,
जयति जय-जय फेण्डेश्वराय।।
श्री ढोल-जगन्नाथ, तेरे तीनहुँ संगा,
शिव के माऽथे जैसे शोभे चन्दा।
पांच पाण्डव को तू ही भाये,
चतुःषष्टि योगिनी देख हरसाये।।२।।
फेण्डेश्वराय – फेण्डेश्वराय,
जयति जय-जय फेण्डेश्वराय।।
शिव शंकर का तू वरदानी,
तुझसे छुपा क्या, हे अन्तर्यामी।
बिन मांगे झोली भर जाये,
जो भी तिहारी शरण में आये।।३।।
फेण्डेश्वराय – फेण्डेश्वराय,
जयति जय-जय फेण्डेश्वराय।।
दुःख विपदा से जो जग से हारे,
जब न मिले कोई तारन हारे।
तब अन्तःकरण से तुझे पुकारे,
क्षण में उसकी व्याधि मिटाये।।४।।
फेण्डेश्वराय – फेण्डेश्वराय,
जयति जय-जय फेण्डेश्वराय।।
नित-नित तेरी जो आरती गाये,
नित-नित तेरी जो महिमा गाये।
धूप-दीप-नैवेद्य चढ़ाये,
तेरी चरण रज शीश लगाये,
भय से वह निर्भय हो जाये।।५।।
फेण्डेश्वराय – फेण्डेश्वराय,
जयति जय-जय फेण्डेश्वराय।।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, श्री फेण्डेश्वराय धीमहि।
तन्नो फण्डेश्वराय प्रचोदयात। तन्नो पितृ देवाय नमः।।
ॐ ग्राम देवताय नमः, स्थान देवताय नमः।
तन्नो श्री जगन्नाथाय नमः।।