महुआ के गंध हवय,
सरगी बेरा बइला चले।
पखना फड़फड़ाय संग,
नदिया के पानी बहे।
(Chorus)
मोर माटी, मोर मया,
गौंटिया के बाड़ी म सुआ।
ढोल बाजय, मांदर बाजय,
गांव के मन ह नाचय हुवा!
(Verse 2)
धान के खेत ह लहकय,
मोर संग चलय रे घूंघट वाली।
करमा-गौरा के गीत सुनाबो,
सुन-सुन हंसे संगवारी।
(Bridge)
कोठी भरय धान हे भइया,
लाली चुनरिया हे बहिनी।
माटी के सुगंध म रमे हाव
गांव के जीवन ह अमीरी।
(Outro)
मोर छत्तीसगढ़ के माटी सोनहा,
इहां के हरियाली अनमोल।
मया के डोरी बांध ल हावे,
सुग्घर गॉंव अउ मन के बोल।