जय हनुमंत विघ्न विनाशक, बल बुद्धि के दाता।
राम नाम के दीवाने तू, जग में उजियारा।
जय बजरंगी महा पराक्रमी,
तेज स्वरूप अजर अविनाशी।
भक्तों के तू दीप जला दे,
हर अंधकार हनुमत भगा दे।
गदा लिए तू रण में गरजे,
तेरी हुंकार से काल भी डर जाए।
जिनके मन में तेरा नाम है,
सच मानो वही भगवान के काम हैं।
सागर लांघ गया तू एक ही छलांग में,
राम का संदेश लिया तू अभिमान में।
सीता को तूने दिलाया भरोसा,
लंका जलाई – दे दिया संदेशा।
ब्रह्मा, विष्णु, महादेव भी,
तेरे गुणों को कहें अभी भी।
शिव का अंश, राम का दास,
तेरे बिना अधूरी हर आस।
राम नाम जब तू गाता,
संपूर्ण जग हर्षित हो जाता।
तेरे दम से पर्वत हिलते,
दुष्ट राक्षस कांपते-डरते।
नयन तेरे अग्नि समान,
करुणा में भी गहराई जान।
जब तू बोले, वाणी अमृत,
जब तू चले, बहे ऊर्जा युक्त वृत।
तेरे पथ में कांटे नहीं ठहरे,
हर भक्त तेरे नाम पे बहरे।
जो भी संकट में तेरा ध्यान करे,
तू उसके जीवन से विष हर ले।
तू ही शिक्षा, तू ही शक्ति,
तू ही जीवन, तू ही भक्ति।
तू प्रेरणा युवा बन जाए,
तेरा नाम हर हृदय गुनगुनाए।
विद्या, यश, बल, नीति सिखाए,
हर कमजोर को वीर बनाए।
राम तेरे रोम-रोम में बसते,
तेरे नाम से ही दुख कटते।
नव युग का तू नायक हो,
हर दिल का दीपक हो।
हनुमत कृपा जिसे मिल जाए,
राम नाम में प्रीत बस जाए।