नाम याद रखो: चैतन्य शुक्ला, वो आवाज़ है जो गूँजे हर गलियारों में।
वो लड़का है लक्की, जो रोशनी लाया अंधेरे मज़धारों में।
युवा है, कर्मठ है, जुझारू है ये नेता,
जनहितैषी सोच से, बदल रहा है तकदीर और खेता।
अपने नगर के लिए, रखता है दूरदर्शी विज़न,
यही है असली जननायक, यही है अपना मिशन!
(वर्ज़ 1)
भीड़ से हटके, चलती इसकी राह,
मेहनत और लगन, यही है इसकी चाह।
जब सब थे ख़ामोश, इसने उठाया सवाल,
न्याय के लिए लड़ना, इसका हर एक हाल।
कभी नहीं रुकना, इसने सीखा है चलना,
मुश्किलों से भिड़ना, हर चुनौती को झेलना।
लक्की नाम में मस्ती, पर काम में है दम,
गरीबों की सेवा, इसके लिए न कोई भरम।
घर-घर की बात, हर गली की पहचान,
चैतन्य का काम, बन रहा है सबकी शान।
(हुक)
नाम याद रखो: चैतन्य शुक्ला, वो आवाज़ है जो गूँजे हर गलियारों में।
वो लड़का है लक्की, जो रोशनी लाया अंधेरे मज़धारों में।
युवा है, कर्मठ है, जुझारू है ये नेता,
जनहितैषी सोच से, बदल रहा है तकदीर और खेता।
अपने नगर के लिए, रखता है दूरदर्शी विज़न,
यही है असली जननायक, यही है अपना मिशन!
(वर्ज़ 2)
सिर्फ़ आज की नहीं, ये सोचता है कल की बात,
कैसे बेहतर हो भविष्य, कैसे सुधरे हर हालात।
शिक्षा हो अच्छी, सुविधा हो पानी की,
चैतन्य की प्लानिंग, हर समस्या की है ख़ात्मा की निशानी।
झुझारू इतना कि जीत कर ही दम लेता,
जब तक न मिले हक़, चैन से न सोता।
ये है बदलाव का चेहरा, ये है उम्मीद की किरण,
इसके साथ चलो, तो सफ़ल होगा हर चरण।
ये नेता सच्चा, ये लक्की अपना भाई,
मिलकर साथ देना है, अब देर न हो जाए!
(ब्रिज)
पुरानी सोच को त्यागो, नए विज़न को देखो,
चैतन्य शुक्ला की लगन को, तुम पहचानो।
ये केवल लक्की नहीं, ये है अपना भरोसा,
जो नगर को देगा एक नई सी रोशनी का मौक़ा।
(हुक)
नाम याद रखो: चैतन्य शुक्ला, वो आवाज़ है जो गूँजे हर गलियारों में।
वो लड़का है लक्की, जो रोशनी लाया अंधेरे मज़धारों में।
युवा है, कर्मठ है, जुझारू है ये नेता,
जनहितैषी सोच से, बदल रहा है तकदीर और खेता।
अपने नगर के लिए, रखता है दूरदर्शी विज़न,
यही है असली जननायक, यही है अपना मिशन!
(आउट्रो)
चैतन्य शुक्ला (लक्की)... जिन्दाबाद!
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