शुरू से सीधा हूँ, झुकना मना है,
मुश्किलें आएँ, पर रुकना मना है।
गिरा कई बार, पर टूटा नहीं,
जलता रहा मैं, पर रूठा नहीं।
नींदें कुर्बान हैं, ख्वाबों की खातिर,
मेहनत है मेरा असली हथियार सिर।
बोले जो पीछे – “तू कर नहीं सकता,”
आज वही कहते – “भाई तू कमाल कर गया!”
दुनिया को दिखाना है, नाम बनाना है,
वक्त से आगे चल, मुकाम उठाना है।
बहानों से नाता, अब तोड़ा मैंने,
अब हर दीवार को मैंने जोड़ा मैंने।
💥 रुकना? ना भाई, रुकना मना है! 💥
थकना? हाँ, पर झुकना मना है!
जीतूंगा नहीं तो लड़ूंगा ज़रूर,
मैं खुद अपनी तक़दीर का गुरूर!