बरसों बाद आज ये मौसम, खुशियों का पैगाम लाया है, बिछड़ा था जो दिल का साथी, फिर से सामने आया है।
यार फिर से मिल गया, दिल का फूल खिल गया, सूनी राहों में जैसे, प्यार का सावन मिल गया।
अंतरा 1 :
यादों की वो गली पुरानी, आज फिर महकने लगी, हंसते-गाते बीते लम्हे, आंखों में चमकने लगी।
वो शरारत, वो बातें सारी, फिर से दिल दोहराने लगा, बीता हुआ हर एक किस्सा, गीत नया बनाने लगा।
मुखड़ा :
यार फिर से मिल गया, दिल का फूल खिल गया, सूनी राहों में जैसे, प्यार का सावन मिल गया।
अंतरा 2 :
वक्त की लंबी राहों ने, हमको कितना दूर किया, लेकिन सच्ची दोस्ती ने, दिल से दिल को जोड़ दिया।
आज गले जब हम मिले हैं, दूर हुए सब ग़म यहाँ, जैसे सूखे बाग़ में फिर, आ गया हो मधुमास नया।
अंतरा 3 :
चाय की प्याली, हंसी के किस्से, फिर वही अंदाज़ है, दोस्ती के इस रिश्ते में, आज भी वही राज़ है।
दौलत क्या और शोहरत क्या, सब फीके लगते हैं, जब पुराने यार अचानक, अपनों जैसे मिलते हैं।
समापन :
रहे सलामत ये यारी, रहे सदा ये प्यार, जीवन की हर राह में, संग रहे मेरा यार...
🎶 यार फिर से मिल गया, दिल का फूल खिल गया...