गुस्ताख़ नज़रों ने
देखा है मुझको,
ख़ुशबू फ़िज़ा की
करे बेकरार मुझको।
दिल की सुनें तो रहा जाए ना,
रहती रहूं अपने दिल के कोने में,
ग़म हूं अपने ख़्यालों में,
दिल सुबह-शाम लिखती रहूं मैं अपनी दास्तां।
हाय राम, हाय राम...
ग़म हूं अपने ख़्यालों में,
दिल सुबह-शाम लिखती रहूं मैं अपनी दास्तां, हो...
सबसे पहले अपनी सुनूं,
दिल की किताब में मैंने छुपाया है खुद को।
ख़ुशबू फ़िज़ा की करे बेकरार मुझको।
ग़म हूं अपने ख़्यालों में,
दिल सुबह-शाम पर तुम्हें लिख नहीं पाऊं मैं उसका नाम।
हाय राम, हाय राम