ओमकार स्वरुप श्री वागीश गंग जटाधरम ।
गले मुण्डन माल नेत्र विशाल श्री वृषभध्वजम ॥ चन्द्र मौलि त्रिनेत्र शंकर भस्म अंग विभूषितम ।
बागीश नाथ अनाथ के तुम नाथ हो विश्वेश्वम.। जटा मुकुट सुकर्ण कुण्डल सर्प अंग सुशोभितम विन्ध्य माला शैल मध्ये आसनम पदमासनम आदिदेव सुदेव श्री महादेव हर विश्वम्भरम ।
बागीश नाथ अनाथ के तुम नाथ हो विश्वेश्वम.।
रुद्र रुप सुतेजकान्ती पान कियो हलाहलम । विल्वपत्र सुपुष्पमाला गंध धूप नैवेद्यकम ।।
हाथ डमरु त्रिशुल सोहे गौरि संग सदाशिवम् ।
बागीश नाथ अनाथ के तुम नाथ हो विश्वेश्वम.।सोमनाथ श्री मल्लिकार्जुन महाकाल, रामेश्वरम तृम्बकेश्वर भीमाशंकर घृथणेश्वर दुख हरम विश्व, वैद्य, केदार हर, नागेश, ओमकारेश्वरम ।
बागीश नाथ अनाथ के तुम नाथ हो विश्वेश्वम.।
क्षेत्रपाल सुपाल भैरव योगिनी संग भूषितम. । गगन बेधित गंगधारा, आदि अंत समाहितम ।। चन्द्रशेखर हे महेश्वर परम प्रिय परमेश्वरम।
बागीश नाथ अनाथ के तुम नाथ हो विश्वेश्वम.।
मंद मंद सुगंध शीतल वायु बहे निरन्तरम । "बागीश की अनुपम कृपा से भक्तजन पावैंगतिम दर्श स्पर्श करेजोनर शिव मेटदें उनके भरम।
बागीश नाथ अनाथ के तुम नाथ हो विश्वेश्वम.।
नील कंठ हिमाल जलधर देव मेरे प्रिय परम शुद्ध बुद्धि प्रकाश भरदो दूर करदो सब भरम दुःख, शोक, अशांति पापों का करो क्षय है शिवम।
बागीश नाथ अनाथ के तुम नाथ हो विश्वेश्वम.।
रविवार सुभद्र चौदस प्राप्तये फलदायकम
"अंकित" बिनागंज निवासी कियो मंगल दायकम
कृपा रहे सदैव हे बागीश ईश महेश्वरम |
बागीश नाथ अनाथ के तुम नाथ हो विश्वेश्वम.।