बैंगलोर की गलियों में थी एक मुलाकात
ट्रेनिंग के बहाने, चल पड़ी एक बात
अलग शाखाएं पर एक सी भी राहें,
बातों की बहार में छुपी कुछ चाहे
तेरी मुस्कान वो हल्की सी झिझक
मेरे दिल की धड़कनों में तेरा असर
पहली बार जब पकडा तूने मेरा हाथ
वो रेस्टोरेंट की टेबल बन गई मेरी जज्बात
जनवरी की वो शाम भी खास
जब दिल ने कहे अपने हर एहसास
तेरी आखों में जो बात थी
मेरे लबों पे वही बात थी
धीरे धीरे जो पास आए
वो पल ने हमें हमेशा के थिए मिलाए
जनवरी की वो शाम.. हमारी शुरुवात
फरवरी आई, तेरे हाथ में गुलाब
झुके घुटनों पर तू - जैसे रुक गया सब हिसाब
वो पहला फूल अब भी है मेरे पास
हर पंखुडी में बसी है तेरी साँस
वक्त बदला पर नही बदली ये बात
हर रोज में है तेरा साथ
अब भी हर सुबह तुझसे शुरू होती है,
और दुआ है
ये कहानी यू ही चलती रहें हमेशा के लिए
जनवरी की वो शाम भी खास
जब दिल ने कहे अपने हर एहसास
तेरी आखों में जो बात थी
मेरे लबों पे वही बात थी
आज भी वैसा ही है अहसास
वो पहली शाम,आज भी है हमारे पास
जनवरी की वो शाम
एक वादा एक आस