[Intro]
1. जिंदा हूं... पर क्या ये जीना है,
हर सांस में दर्द का समुंदर पीना है।
[Verse]1
2. मौत मांगता हूं पर वो भी दूर खड़ी है,
दुआओं का असर अब किस्मत से बड़ी है।
[Chorus]
जिंदा हूं... पर क्या ये जीना है,
[Verse]2
3. सपनों की ताबीर मिट्टी में सो गई,
खुशियों की हर राह दर्द से खो गई।
[Chorus]
जिंदा हूं... पर क्या ये जीना है,
[Verse]3
4. दिल रोता है हर ग़म की सदा में,
जिंदगी उलझ गई सवालों की सजा में।
[Chorus]
जिंदा हूं... पर क्या ये जीना है,
[Verse]4
5. आँसू भी अब हंसते हैं मेरी हालत पर,
मुस्कान गुम है कहीं खामोशी की क़बर पर।
[Chorus]
जिंदा हूं... पर क्या ये जीना है,
Writer: ललित हरियाणवी