मात बरसाओ कृपा अब, खोल अपने द्वार।
हाथ जोड़े भक्त सारे, कर रहे जय कार।
शक्ति की है माँ स्वरूपा, दे विपद सब टाल।
सिंह की करती सवारी, हाथ में है ढाल।
मात की चौकी सजी है, पुष्प का श्रृंगार।
हाथ जोड़े भक्त सारे, कर रहे जयकार।
मुंड माला है गले में, धूम्रलोचन लाल।
शत्रु का संहार करने, बन गई है काल।
सिद्ध करती कामनाएँ, माँ करे उद्धार।
हाथ जोड़े भक्त सारे, कर रहे जयकार।
लाल धारे वस्त्र माँ ने, भय करे सब दूर।
भाल माँ का है दमकता, सोहता सिंदूर।
है मनोरम खूबसूरत, मात का दरबार।
हाथ जोड़े भक्त सारे, कर रहे जयकार।
देव करते गान तेरा, पुष्प की बरसात।
सृष्टि के कण-कण में गूँजे, नाद तेरा मात।
बाजते हैं ढोल-ताशे, झूमता संसार।
हाथ जोड़े भक्त सारे, कर रहे जयकार।