[Male Vocal]
[Violin Solo]
[Intro]
धूप में जलीं राहें, पाँवों में छाले,
फिर भी हँसी होठों पे, दिल के उजाले।
सपनों का बोझा साइकिल पे बाँधा,
शहर बुला रहा — चल पड़े दो साए।
मिट्टी से उड़ान है, ये दो दिलों की जान है,
थोड़ी सी ठोकर, थोड़ा अरमान है।
सूरज सा जलना है, राकेश सा चलना है,
कदमों में आसमान है… ओ ओ…
मिट्टी से उड़ान है
काँच की दीवारों में, अपने सपने देखे,
कमीज़ पुरानी थी, पर इरादे सच्चे।
“सर” बोलते हुए, सीखा मुस्कुराना,
हर ‘ना’ में भी, ढूँढा एक “हाँ”।
कदम काँपे थे पहले दिन,
पर दिल नहीं हारा कहीं…
: मिट्टी से उड़ान है, ये दो दिलों की जान है,
थोड़ी सी ठोकर, थोड़ा अरमान है।
सूरज सा जलना है, राकेश सा चलना है,
कदमों में आसमान है…
पहली सैलरी की लिफाफे में,
लिखा था “शुक्रिया माँ।”
कंधे पे रखी थी हाथ दोस्त की,
कहा — “अब तो हुआ न काम!”
: मिट्टी से उड़ान है, कल भी यही पहचान है,
हर गिरना भी एक नई जान है।
सूरज-राकेश की कहानी ये,
हर दिल में एक अरमान है…
मिट्टी से उड़ान है… ओ ओ ओ…
[Verse]
[Verse]
[Verse]
[Outro]
[Chorus]
[Outro]
[Guitar Solo]
[Male Vocal]
[Pre-Intro]
[Final Chorus]