मैं एक नन्हा सा बालक हूं अपने वतन का परिचालक हूं
जिधर मुड़ाओ मुड़ जाऊंगा कोई करिश्मा कर जाऊंगा
तन मन दोनों ही है कोमल
बोलूं जैसे बोले कोयल
वर्तमान को मैं पहचानूं
भूत भविष्य का ज्ञान ना जानू
मात पिता शिक्षक हैं प्यारे
बंधु बाल सब मित्र हमारे
जाती पाती का भेद ना जानू
मीठी बोली से पहचानूं
पड़ लिखकर जब बड़ा बनूंगा
जुल्म नहीं इंसाफ करूंगा
मेरे प्रभु बस इतना करना
दुष्ट जनों से दूर ही रखना
निस दिन उठकर तुम्हें मनाऊं
ईश भजन और कविता गाऊं