आ....
आ.....आ....
आ......
तिनका तिनका बिखर गई है।
मेरी धड़कन किधर गई है।
पीछे पीछे भागा दौडा,
आगे आगे जिधर गई है।
दुनिया के मेले में ढूँढा,
उधर गई या इधर गई है।
खतरा कतरा कतरा आया,
मुस्कानें भी बिफर गई है।
तिनका तिनका बिखर गई है।
मेरी धड़कन किधर गई है।
मानवता मकडी जाले में,
सच को दीमक कुतर गई है।
नोटों का बंडल जो उछला,
आज गवाही मुकर गई है।
तिनका तिनका बिखर गई है।
मेरी धड़कन किधर गई है।
बूँदों सी ये बढती उलझन,
सुलझन डरकर सिहर गई है।
माँ के कदमों को छूते ही,
सब चिन्तायें सुधर गई है।
तिनका तिनका बिखर गई है।
मेरी धड़कन किधर गई है।
ममता का जो साया पाया,
मेरी काया निखर गई है।
लिखते लिखते रुक गया तो,
ग़ज़ल "शिवाजी" ठहर गई है
तिनका तिनका बिखर गई है।
मेरी धड़कन किधर गई है।