💖 विवेक और गंगा की प्रेम कहानी - एक गीत
(शीर्षक: "तू ही मेरा किनारा")
अंतरा 1:
जब से तुझसे नज़र मिली है,
दिल ने बस तुझको ही चाहा।
हर एक सांस में तू बसी है,
तेरे बिना लगे सब कुछ अधूरा।
कोरस:
ओ गंगा, तू बहती रही,
मैं विवेक तेरे संग चलता रहा।
प्यार की इस नदिया में हम,
हर मोड़ पर एक दूजे का सहारा बना।
अंतरा 2:
तेरी हँसी में है रौशनी,
मेरे अंधेरों का जवाब।
तेरे ख्वाबों में ही जिया हूँ,
तू ही मेरी दुनिया, तू ही मेरा ख्वाब।
कोरस (दोहराव):
ओ गंगा, तू बहती रही,
मैं विवेक तेरे संग चलता रहा।
प्यार की इस नदिया में हम,
हर मोड़ पर एक दूजे का सहारा बना।
ब्रिज:
जो भी तू चाहे, मैं बन जाऊँ,
तेरे दुख में भी मुस्काऊँ।
हमसफर बनके उम्र भर,
तेरे साथ ही खुद को पाऊँ।
अंतिम पंक्तियाँ:
अब ना कोई फासला रहे,
तेरे और मेरे दरमियां।
गंगा और विवेक की कहानी,
बन जाए सदा की दास्तान।