वृंदावन में दो लोगे तो राधे–राधे बोलोगे,
कान्हा के दरबार में जाओगे तो मन से झूमोगे.
मोर मुकुट वाले श्याम जब मुस्काए धीरे,
राधा नाम जपो तो दुख भी कट जाएँगी पीरे।
गली–गली में बजती है मुरली की मीठी तान,
बरसाने की राहों में बिखरा है सारा गान।
कुँज गली से निकले जब बाँके बिहारी,
भक्तों की पंक्ति बोले – “जय हो लाला मुरारी।”
यमुना के तट पर बैठो, शांति ही शांति पाओगे,
एक बार “राधे” बोलो, लाखों सुख घर लाओगे।
वृंदावन में दो लोगे तो राधे–राधे बोलोगे,
मन के सारे बोझ भुलाकर खुशियों में डूबोगे.
श्याम के चरणों में मिलती है अनंत करुणा,
राधा नाम में बसती है पूरे जग की सुगंधा।
टेसू के फूलों जैसी रंगीली है ये धरती,
हर घाट पर मिलती है भक्ति की मधुर अमरती।
नंद भवन की सीढ़ियों पर बैठो ज़रा ठहर के,
कान्हा की लीला सुन लो किसी साधु से कहर के।
राधा बिना श्याम अधूरे, श्याम बिना राधा,
जो प्रेम यहाँ मिल जाए, मिलता नहीं और आधा।
वृंदावन में दो लोगे तो राधे–राधे बोलोगे,
कान्हा के घर जाओगे तो खुशियों से फूलोगे.
श्रद्धा से जो चलेगा, उसे राह मिल जाएगी,
राधे नाम की ज्योत सदा मन में जल जाएगी।