चंदा मामा मुस्काए,
तारों को गोदी में सुलाए।
"रात भर जगना है काम मेरा,
सुबह तक सबको सपने दिखाएँगे!"
बारिश की छतरियाँ उल्टी खड़ी,
ऊपर से नीचे पानी बहा।
बच्चे ने कहा, "अरे वाह यार!
ये तो है मस्ती की पाठशाला!"
बिल्ली ने पहनी टोपी लाल,
मँगवाए चूहों ने केक मलाईवाला।
"आज तो दोस्ती, नहीं कोई डर,"
चूहे ने कहा, "काटेंगे साथ बाँटकर!"
मिठाई की दुकान में रसगुल्ला बोला,
"मैं नहीं हूँ गोला, हूँ मीठा तोला!"
एक बच्चे ने चखा, गाल फुलाए,
"अम्मा! ये तो है स्वर्ग की खुशबाई!"
बादल ने ली साइकिल चलाने की ठान,
पहाड़ों से टकराया, हुआ छतन्नी बान।
बोला, "ओहो! ये रास्ता कितना टेढ़ा,
अब तो बरसूँगा, गिरकर यहीं पेढ़ा!"
लाल पेंसिल ने किया करामात,
खींचा सेब और बनाया हाथी।
बच्चे ने पूछा, "ये कैसे होता?"
पेंसिल बोली, "मन में है कोई सपना होता!"
चिड़िया ने पहनी लहँगा पीला,
डाली-डाली पर ठुमके लीला।
कौआ देखकर बोला, "ओह हो!
तू तो बन गई रानी मस्ती की!"
समुन्दर ने देखा सपना एक,
खुद को बनाया ऊँचा पर्वतरेख।
मछलियाँ हँसीं, "अरे पागल हो गए!
तुम तो हो नमकीन पानी के झोले!"
जूते थे टेढ़े, मियाँ बहुत शरारती,
बाएँ को जाएँ, दाएँ को ले जाएँ पैर ज़िद्दी।
बच्चा चिल्लाया, "अब बंद करो यार!
मुझे तो लगा तुम हो जूते भारी भूलभुलैया!"
सूरज बोला बादल से, "भाई,
इतना रूठना अच्छा नहीं।
बरसकर तू भी मुस्कुरा ले,
इंद्रधनुष तेरा मेकअप होगा नया!"