(Intro - Slow & Melodic)
रे मेरे मन, ढूंढ ले कोई किनारा,
थक गया अब नाव सारा।
कब तलक भटकेगा दुनिया की भँवर में,
कौन होगा संग इस अंतिम सफ़र में?
(Verse 1 - Soft Dholak & Flute Melody)
जीवन में उल्लास नहीं है,
कोई मेरे पास नहीं है,
ख़ास नहीं है कोई जिसको,
दिल का दर्द बताऊँ,
अच्छा है, मैं मर जाऊँ...
(Chorus - Chorus singers echo in the background)
कौने नगरिया जाऊँ, कहां मिलेंगे अपने,
सब झूठे हैं, सब हैं सपने।
(Verse 2 - Folk Beats Pick Up)
हम तो हो गए उसके खिलौने,
रिश्ते हमारे हो गए बौने,
पौने चार की ट्रेन के नीचे,
आकर ही कट जाऊँ,
अच्छा है, मैं मर जाऊँ...
(Chorus - Repeated with a call & response style)
कौने नगरिया जाऊँ, कइसे जियें हम,
इहाँ बस धोखा, नयनों में है ग़म।
(Bridge - Soft & Emotional with Sarangi & Ektara)
बाबुल के आँगन में छूटे सब साए,
माई के आँचल से अब कौन बुलाए?
संसार के मेले में तन्हा हुआ हूँ,
सबके होते भी वीरहा हुआ हूँ।
(Outro - Slow & Soulful)
अब इस नगरिया में जीना कठिन है,
कहीं और चल दूँ जहाँ शांति मिल जाए।
कौने नगरिया जाऊँ, कौने नगरिया जाऊँ,
जहाँ दर्द कोई समझे, जहाँ चैन आ जाए...