गाना शीर्षक: "रूह की बात"
(अंतरा 1)
तेरी यादें जब भी आती हैं,
हवा कुछ कह सी जाती है।
धड़कनों में वो बात है,
जो तेरे बिना अधूरी सी लगती है।
(कोरस)
थोड़ा रुक जा, ऐ पल ज़रा,
सांसों में उसकी खुशबू भरा।
तेरे बिना भी, तू साथ है,
जैसे चाँद कहीं, पर रात है।
(अंतरा 2)
सन्नाटा भी अब गुनगुनाता है,
तेरी आवाज़ में कुछ तो बात है।
हर लम्हा तुझसे जुड़ता जाए,
दिल खुद को तुझमें ही पाए।
(कोरस दोहराव)
थोड़ा रुक जा, ऐ पल ज़रा,
सांसों में उसकी खुशबू भरा।
तेरे बिना भी, तू साथ है,
जैसे चाँद कहीं, पर रात है।
(ब्रिज)
तू हो ना हो, ये रूह तेरा गीत गाए,
तेरे जाने के बाद भी तू रह जाए।
वक़्त ठहर जाए इन लम्हों में,
तेरे एहसास की इन राहों में।
(आउट्रो - धीमी धुन में)
सुकून सा तू, खामोशियों में,
तेरे बिना भी, दिल तुझमें ही रहे।