मेरे साये की तरह तुम भी मेरे साथ होती
फिर तो क्या ही बात, क्या ही बात होती
ख्वाबों के जैसे ही हकीकत में मुलाकात होती
फिर तो क्या ही बात, क्या ही बात, क्या ही बात होती
तेरी इतनी फिक्र करने वाला नहीं है और कोई भी
मिला होता मौका मुझे तो ये मालूम होता तुम्हें भी
तुमसे बढ़कर दुनिया में कभी कुछ मिला नहीं
फीके लगते हैं मुझे अब तो सारे हीरे मोती
तुमको ही देखने से हर दिन की शुरुआत होती
फिर तो क्या ही बात, क्या ही बात, क्या ही बात होती
भटकता रहता अब भी तेरे दिल की गलियों में
उलझा सा रहता हूँ ज़िंदगी की इन पहेलियों में
खुली आँखों से भी देखता तेरे और मेरे सपने
काश कि तुम भी कुछ ऐसे ही सपने संजोती
बिन मौसम भी अगर थोड़ी सी बरसात होती
फिर तो क्या ही बात, क्या ही बात, क्या ही बात होती
मेरे साये की तरह तुम भी मेरे साथ होती
फिर तो क्या ही बात, क्या ही बात होती
ख्वाबों के जैसे ही हकीकत में मुलाकात होती
फिर तो क्या ही बात, क्या ही बात, क्या ही बात होती
[Male Vocal]
[Violin Solo]
[Guitar Solo]
[Pre-Intro]
[Intro]
[Verse]
[Chorus]
[Final Chorus]
[Female Vocal]