महाकाल का दास हूँ, डर मुझे क्या देगा?
जिसके पास शिव का नाम है, उसे कौन हरा देगा?
मत पूछो पहचान मेरी,
त्रिशूल लिए खड़ा वीर हूँ।
ना झुकता किसी के आगे,
क्योंकि शिव का शमशान धीर हूँ।
जिनके रोम-रोम में बसा
वो नीलकंठ का नाम है,
मेरी चाल में नाथ का राग,
हर शब्द में हरि-विधान है।
नाम ही है अस्त्र मेरा,
ॐ नमः शिवाय मंत्र मेरा।
भीड़ में अलग पहचान हूँ मैं,
महाकाल का भक्त इंसान हूँ मैं।
काल पे भी विजय पाई,
वो महाकाल मेरा साथी है।
कपाट खोल के दिल के भीतर,
बस वही एक राजा बाकी है।
ना तंत्र में, ना मंत्र में,
मुझे सिर्फ़ भक्ति पर यकीन है।
हर साँस में बस बम-बम है,
हर धड़कन में तांडव की गूंज है।
मैं नाचूं जब श्मशान जले,
भस्म रमा के मैं चल दूँ रे।
शिव ही आदि, शिव ही अंत,
नाम जपे तो मिटे भ्रम रे।