(पद्य 1)
अग्नि की भट्ठी में तपकर
भारत की आत्मा में जन्म लेती है
वीरता की ज्वाला, दिलों में जलती
स्वतंत्रता की चाह, आत्मा को जगाती
(कोरस)
भारत की ज्वाला, आत्मा की गहराई
सेना की वीरता, दुश्मनों को ध्वस्त करती
एकता की दीवार, अटूट और अखंड
भारत की रक्षा, हमारा परम उद्देश्य
(पद्य 2)
जवान, देश के सच्चे प्रहरी
जान की बाजी लगाते, देश के लिए समर्पित
मृत्यु के द्वार पर खड़े, जीवन का अर्थ समझते
भारत की जीत, आत्मा की शांति
(कोरस)
भारत की ज्वाला, आत्मा की गहराई
सेना की वीरता, दुश्मनों को ध्वस्त करती
एकता की दीवार, अटूट और अखंड
भारत की रक्षा, हमारा परम उद्देश्य
(पद्य 3)
कारगिल से सियाचिन तक
सेना की वीरता, दुश्मनों को पराजित करती
एकता और अखंडता, भारत की आत्मा की धड़कन
वीरता की कहानी, आत्मा की गाथा
(कोरस)
भारत की ज्वाला, आत्मा की गहराई
सेना की वीरता, दुश्मनों को ध्वस्त करती
एकता की दीवार, अटूट और अखंड
भारत की रक्षा, हमारा परम उद्देश्य